अधिकार में वृद्धि के साथ प्रदेश में प्रधानों के हालात भी बदलने जा रहे हैं । अव प्रधान राजपत्रित अधिकारी होंगे उन्हें लेवल -7 के तहत प्रति माह 44900 रुपये वेतनमान देने का निर्णय लिया गया है । कैबिनेट की बैठक में निर्णय के बाद कार्मिक एवं पंचायती राज विभाग ने आदेश जारी कर दिया है । इसके लिए लोक जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में भी आवश्यक संशोधन कर लिए गए हैं । चुनाची वर्ष में प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने गाव की सरकार को होली का तोहफा दिया है । खास यह कि आगामी महीने में पंचायतों के लिए चुनाव होने जा रहे हैं और नए चुने हुए प्रधानों को सरकार के इस फैसले का लाभ मिलेगा । इन्हें वेतन पंचायती राज विभाग से दिया जाएगा । इसके लिए विभाग का अलग बजट और खाता होगा । जिला पंचायतीराज अधिकारी श्रीवास्तव ने बताया कि विधायक और सांसद की तरह प्रधानों के लिए भी वेतन का प्रावधान किए जाने की लंबे समय से मांग की जा रही थी ।
हर वर्ष वेतन पर खर्च होंगे 106 करोड़ से अधिक
प्रधानों को विधायकों और सांसदों की तरह फिक्स वेतन मिलेगा । चूंकि प्रधानों को लेवल -7 के अंतर्गत 44900 रुपये वेतनमान में रखा गया है । इस पर इन्हें वर्तमान दर से 28 फीसदी महंगाई भत्ता भी मिलेगा । इस लिहाज से 12576 रुपये मागाई भत्ता मिलेगा । इस तरह से इनका कुल वेतन प्रति माह 57476 रुपये निर्धारित कर प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा गया है । अभी प्रधानों को मानदेय के रूप हर महीने 3500 रुपये मिलते हैं । वित्त विभाग प्रस्तावित वतन को ही मंजूरी दे देता है तो प्रत्येक प्रधान पर हर महीने 53976 रुपये का अतिरिक्त भार आएगा । जिले में 1540 पंचायतें हैं और प्रधानों के वेतन पर ही हर साल 106 करोड़ 21 लाख से अधिक के बजट का प्रावधान करना होगा ।
पेंशन पर अभी निर्णय नहीं
प्रधानों को विधायकों की तरह वेतन तथा अन्य सुविधाओं की तो घोषणा की गई है लेकिन पेंशन पर अभी गतिरोध बना हुआ है । बताया जा रहा है कि सरकारी कर्मचारियों न्यू पेंशन के अंतर्गत लाया गया है , जिसकी राशि बाजार पर निर्भर करेगी । ऐसे में यदि प्रधानों के लिए पेंशन को घोषणा की गई तो सरकार को कर्मचारियों को नाराजगी उठानी पड़ सकती है ।
इस मामले में प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास का आदेश आया है । गाइडलाइन का इंतजार है । प्रमुख सचिव के निर्देश के क्रम में सीडीओ और डीपीआरओ को आवश्यक कार्रवाई के लिए कहा गया है । भानु चंद्र गोस्वामी , डीएम

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