आज की युवा पीढ़ी शिक्षित होके या तो विदेशी कंपनीयो में जॉब की तरफ भाग रहे है या फिर सरकारी जॉब के पीछे भाग रहे है । लेकिन वही छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के एक छोटे से गांव सिरी की वल्लरी चंद्राकर ने मिसाल पेश की है । BE ( IT ) व एमटेक ( कंप्यूटर साइंस ) कर के रायपुर के एक कॉलेज असिस्टेंट प्रोफेसर की जॉब की लेकिन कुछ दिन नोकरी करने के बाद इस्तीफा दे दिया ।
आज वल्लरी अपने गांव में उन्नत खेती कर के दुसरो के लिए एक मिसाल है ।
वह कहती है कि अन्नदाता होने में जो सुख व सुकून है, वह किसी कारोबार या नोकरी में नही है।
वल्लरी के पिता जल मौसम विज्ञान विभाग रायपुर में उपअभियंता है। वल्लरी पढ़ाई के दौरान अपने पिता के साथ अक्सर गांव अति रहती थी ।
वही अपने नाना जो खेती करते थे
वल्लरी उनसे खेती की जानकारी लेती रहती थी । तब से ही वल्लरी के मन मे खेती करने का एक जनून ऐसा सवार हुआ कि वो असिसटेंट प्रोफेसर की नॉकरी छोड़ दी और खेती करने अपने गांव आगये ।
वल्लरी का माना है कोई भी नोकरी खेती से श्रेष्ठ नही है
वल्लरी की तीन पीढ़ियों में किसी ने नही की खेती
वल्लरी के दादा तेजनाथ चन्द्राकर प्राचार्य थे । शासकीय सेवा में होने के कारण उन की तीन पीढ़ियों में किसी ने खेती नही की ।
माता पिता को है वल्लरी पर गर्व
वल्लरी की माँ बताती है उन के दो बिटिया है पर उन दोनों ने कभी बेटे की कमी मासूस नी होने दी ।
वल्लरी के करीब 32 एकड़ खेत है जहाँ पर वो सब्जी की खेती करती है ।
वल्लरी की छोटी बहन पल्लवी चंद्राकर एक कॉलेज में सहायक प्राध्यापक है। वल्लरी और पल्लवी के माता पिता को उन पर गर्व है ।
वल्लरी करीब 50 से 60 लोंगो को रोजगार भी देती है
वल्लरी बताती है पहले उन डेढ़ लाख रुपए प्रति एकड़ खर्च करने पड़े ।
करीब एक साल बाद सारे खर्च निकालकर प्रति एकड़ करीब 50 हजार रुपये की आय प्राप्त होई । और साथ ही 50 से 60 लोगो को नियमित रोज़गार भी देती है ।
साथ ही वल्लरी शाम को करीब 35 लड़कियों को computer व English
की जानकारी देती है । और किसानों को उन्नत तकनीक से खेती करने के लिए कायशाला आयोजित करती है ।
वल्लरी करती है सब्जियों की खेती
वल्लरी अपनी बाड़ी में मिर्ची, करेला, बरबट्टी, लौकी, टमाटर, आदि सब्जिया उगती है । उन की सब्जियों की मांग बहोत ज्यादा है ।ओडिशा, भोपाल, इंदौर, नागपुर,रायपुर, से लेके दिल्ली तक उन के खेतों में पैदा सब्जियों की मांग है।









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