यही नहीं, दलितों में अनुसूचित जाति का भी आरक्षण उत्तर प्रदेश में 21.5 फीसदी है, लेकिन कुल चयनित अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों की संख्या भी केवल 590 यानी 20.02 फीसदी है।
सामान्य जाति को मिला सबसे अधिक आरक्षण 58.96 फीसदी
ग्राम विकास अधिकारी की परीक्षा के जारी ताजा परिणाम में सामान्य जातियों को गलती से 58.96 फीसदी आरक्षण हो गया है। यह आयोग की एक बड़ी नाकामी माना जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि यदि मामला कोर्ट में गया, तो यह परीक्षा परिणाम आरक्षण नियमावली को खत्म करने का साबित होगा और कोर्ट इस पूरे परीक्षा का परिणाम फिर से घोषित करने का आदेश दे सकता है।
क्या कहते हैं कानून के जानकार
गोरखपुर विश्वविद्यालय विधि संकाय के पूर्व अध्यक्ष एवं विधि विशेषज्ञ प्रोफेसर राम नरेश चौधरी ने रिजल्ट को पूरी तरह आरक्षण नियमावली के विरुद्ध बताया है। उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश राज्य सरकार द्वारा पिछड़ों के 27 फीसदी, अनुसूचित जाति- के 21.5 फीसदी एवं सामान्य अभ्यर्थियों को 50 फीसदी दिए जाने का कानूनी एवं वैधानिक प्राविधान है। अधीनस्थ चयन सेवा आयोग के चेयरमैन सीबी पालीवाल ने आरक्षण नियमावली का खुला उल्लंघन किया है। हाई कोर्ट में उस वीडियो के इस रिजल्ट को चुनौती देने पर पूरी भर्ती प्रक्रिया माननीय न्यायालय निरस्त कर नए सिरे से साक्षात्कार कराने का आदेश दे सकता है, जो संविधान एवं आरक्षण नियमावली के अनुकूल होगा।
आरक्षण को कम नहीं कर सकतेः पूर्व जज, सभाजीत यादव
इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज सभाजीत यादव ने कहा है कि रिजर्वेशन को कम नहीं किया जा सकता। यह कैसे किया गया है, यह जानकारी का विषय है। निचले स्तर पर आयोग की परीक्षाओं में ऐसा भी नहीं हो सकता कि अभ्यर्थी न मिलें। इस मामले में पीआईएल भी हो सकती है, या इस मामले को लेकर चयनित न होने वाले अभ्यर्थी भी चैलेंज कर सकते है।
सामान्य जाति को मिला सबसे अधिक आरक्षण 58.96 फीसदी
ग्राम विकास अधिकारी की परीक्षा के जारी ताजा परिणाम में सामान्य जातियों को गलती से 58.96 फीसदी आरक्षण हो गया है। यह आयोग की एक बड़ी नाकामी माना जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि यदि मामला कोर्ट में गया, तो यह परीक्षा परिणाम आरक्षण नियमावली को खत्म करने का साबित होगा और कोर्ट इस पूरे परीक्षा का परिणाम फिर से घोषित करने का आदेश दे सकता है।
क्या कहते हैं कानून के जानकार
गोरखपुर विश्वविद्यालय विधि संकाय के पूर्व अध्यक्ष एवं विधि विशेषज्ञ प्रोफेसर राम नरेश चौधरी ने रिजल्ट को पूरी तरह आरक्षण नियमावली के विरुद्ध बताया है। उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश राज्य सरकार द्वारा पिछड़ों के 27 फीसदी, अनुसूचित जाति- के 21.5 फीसदी एवं सामान्य अभ्यर्थियों को 50 फीसदी दिए जाने का कानूनी एवं वैधानिक प्राविधान है। अधीनस्थ चयन सेवा आयोग के चेयरमैन सीबी पालीवाल ने आरक्षण नियमावली का खुला उल्लंघन किया है। हाई कोर्ट में उस वीडियो के इस रिजल्ट को चुनौती देने पर पूरी भर्ती प्रक्रिया माननीय न्यायालय निरस्त कर नए सिरे से साक्षात्कार कराने का आदेश दे सकता है, जो संविधान एवं आरक्षण नियमावली के अनुकूल होगा।
आरक्षण को कम नहीं कर सकतेः पूर्व जज, सभाजीत यादव
इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व जज सभाजीत यादव ने कहा है कि रिजर्वेशन को कम नहीं किया जा सकता। यह कैसे किया गया है, यह जानकारी का विषय है। निचले स्तर पर आयोग की परीक्षाओं में ऐसा भी नहीं हो सकता कि अभ्यर्थी न मिलें। इस मामले में पीआईएल भी हो सकती है, या इस मामले को लेकर चयनित न होने वाले अभ्यर्थी भी चैलेंज कर सकते है।
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